Happy Diwali 2018
(1)हिंदुओं का सबसे बड़ा और पवित्र त्यौहार दीपावली.
(Dipawali is the largest and most sacred festival of Hindus)
(2)साफ सफाई पर आधारित त्यौहार दीपावली
(Dipawali festivals based on cleanliness)
(3)पांच दिनों तक चलने वाला त्योहार दीपावली.
(Dipawali is a five days festival)
(4)भगवान धन्वंतरि की पूजा का त्योहार दीपावली.
(Dipawali is the festival of worship of Lord Dhanvantari)
(5)सोने, चांद ी, आभूषण ओर लक्ष्मी जी और गणेश जी की पूजा का त्योहार दीपावली.
(Dipawali is the festival of gold, silver, ornaments and Maa Laxmi and Ganesh Ji)
दीपावली
(Dipawali)
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दीपावली हम हिन्दुओ का सबसे बड़ा और पवित्र त्योहार माना जाता है ये ना केवल पारंपरिक और सांस्कृतिक त्योहार है ,जिसको बच्चे से लेकर बड़े तक सभी पसंद करते हैं , इसे सभी अपने परिवारों,पड़ोसी ,ओर रिश्तोदारो के साथ खुशियों से मनाते हैं। happy diwali 2018
दीपावली का त्योहार रोशनी और मन में नई उमंग भर देता है इस तरह से ना केवल अपने घर के अंदर दीवारों को अपने मन में ग्रसित गमो को भी भूल कर खुशियों के साथ मनाने का त्योहार है दीपावली ,इसमें मिठाइयों की मिठास तो भरी ही होती है। साथ ही जिसमें अमावस्या की घनघोर रात को भी उजाले में बदलने का नाम है दीपावली।ओर खुशयो का त्योहार है दीपावली।
दीपावली की उत्पत्ति और दिवाली कब मनाई जाती है (The celebrations of dipawali and when is Celebrated)
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दीप +अवलि से दिवाली की उतपत्ति होती है ,इस त्यौहार के दिन दीपो की अवलि की पंक्ति बना कर हम अंधकार को मिटाने में जुट जाते हैं, दिवाली का यह पावन पर्व कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनाया जाता है हिंदू कैलेंडर के अनुसार यह पाँच दिन चलने वाला त्योहार कहां जाता है।पहले दीन धनतेरस,दूसरे दिन नरक चौदस ,तीसरे दिन लक्ष्मी पूजन,चौथे दिन गोवर्धन पूजा और पाचवे दिन भाईदूज मनाने की परंपरा है ।इस प्रकार दीवावली पाँच दिनों की उत्साह का त्योहार है जिसकी तैयारी कई दिन पहले से ही कि जाति है।
दीपावली पर सफाई का महत्व (Importance of Cleanliness on Dipawali)
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दीपावली जहाँ हिंदू धर्म के लोगों का महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दिन मां लक्ष्मी के पूजन किया जाता है,और माना जाता है कि मां लक्ष्मी साफ सुथरे घरों में ही प्रवेश करती है इसी बात को ध्यान में रखकर सभी लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं, दीवारों को नए रंगों से रंगा जाता है घर के फालतू सामान बाहर निकाल दिए जाते हैं ,नई वस्तुओं की खरीदारी की जाती है।दशहरे के बाद से ही सब अपने घरो की सफाई में जुट जाते हैं इसमें परिवार के सभी लोग अपना-अपना योगदान देते हैं ,तोरण ,झालर,और सजावट की वस्तुओं से घर सजाया जाता है ,घर को एक मंदिर के समान सजाया जाता है, घर विशेष ध्यान देने का कार्य किया जाता है दिवाली पर,इस प्रकार घर के भीतर ओर घर के बाहर की स्वच्छता का कार्य है दीपावली,एक प्रकार से कहा जा सकता है कि दीपावली ना केवल उल्लास का प्रतीक है साथ ही मिठास और खुशियों से भरी होती है दीपावली।
दिवाली मनाने का कारण (Reason for Celebrating Dipawli)
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दिवाली को रोशनी और उत्सव का त्योहार माना जाता है जो कि मां लक्ष्मी का घर पर आने का संकेत करता है ,साथ ही बुराई पर अच्छाई की जीत ,असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक माना जाता है ,और मान्यता है कि असुरों के राजा रावण को मारकर जब श्री राम जी अयोध्या वापस लौटे तो उनके आने की खुशी में पूरी अयोध्या को रोशनी से जगमगा दिया था,तब से ही दीपावली महोत्सव का प्रारम्भ माना जाता है।
इसके साथ ही दीपावली को कुछ ऐतिहासिक और कुछ धार्मिक घटनाएं से भी जोड़ा जाता है।
(1)माना जाता है कि समुद्र मंथन करने से प्राप्त चौदह रत्नों में से एक लक्ष्मी जी भी प्रकट हुई थी ।
(2) इसके अलावा जैन धर्म के अनुसार महावीर स्वामी का महानिर्वाण भी इसी दिन हुआ था।
(3)सिखों के छठे गुरु श्री हरगोविंद जी के रिहाई की खुशी में भी मनाया जाता है दीपावली ,जब उनको ग्वालियर की जेल से जहांगीर द्वारा छोड़ा गया था।
इस प्रकार दीपावली को मनाने के अनेक धार्मिक और ऐतिहासिक कारण है ,परंतु दीपावली ऐतिहासिक और धार्मिक दोनों ही कारणों से खुशियों ओर उल्लास से भरा हुआ है जिसे बच्चे से लेकर बजुर्ग तक खुशयो के साथ मनाते है। happy diwali 2018
दीपावली के पांच दिन होते हैं महत्वपूर्ण (Deepawali has five days important)
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दीपावली एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ होता है "प्रकाश की पंक्तिया"जो कि दिप अर्थात दीपक ऒर आवली अर्थात लाइन या श्रंखला जिसका मतलब दीपको की श्रंखला होता है।ओर ये दीपावली पाँच दिनों का महोत्सव होता है जो इस प्रकार है।
(1)धनतेरस(Dhanteras)
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हिंदू कैलेंडर के मुताबिक धनतेरस कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशीके दिन यानी दिवाली के दो दिन पहले मनाया जाता है, इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है इसी दिन भगवान धन्वंतरि का जन्म हुआ था ,जो समुद्र मंथन के समय अपने साथ अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे ,और इसी कारण भगवान धन्वंतरी को औषधि का जनक भी कहा जाता है ,इसलिए इस दिन सोने चांदी का समान ओर बर्तन खरीदे जाते हैं ,और पूजा की जाती है धनतेरस के दिन बर्तन खरीदना बहुत ही शुभ माना जाता है।
(2)नरक चतुर्दशी( narak chaturdashi)
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नरक चतुर्दशी जीसे छोटी दिवाली में कहा जाता है,इस दिन मान्यता है कि सरसों का उबटन लगाने से शरीर की सभी रोग और बुराई को खत्म करना खत्म करना माना जाता है।इस दिन सुबह सूर्यदय से पहले उठकर तेल लगाकर पानी में चिरचिरी के पत्ते डालकर स्नान करने ओर विष्णु जी के मंदिर में जाकर भगवान का दर्शन करके सभी पापों से मुक्ति मिलती है साथ ही रूप सौंदर्य प्राप्त होता है।
(3)लक्ष्मी पूजन(laxmi pujan)
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तीसरा दिन दीपावली का होता है जो बहुत महत्वपूर्ण होता है ।इस दिन लक्ष्मी जी की पूजन का विधान है इस दिन देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश तथा हमारे घर के जो भी सोने चांदी के आभूषण आदि का पूजन किया जाता है ,दीपप्रज्वलित किया जाता है। और चारों तरफ रोशनी ही रोशनी किया जाता है दिप मालिका को घर के प्रत्येक स्थान पर रखा जाता है ।नए वस्त्र और माँ लक्ष्मी की आरती के साथ ही लक्ष्मी पूजन किया जाता है।
(4)गोवर्धन पूजा (govardhan puja)
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट उत्सव मनाया जाता है इस दिन सुबह जल्दी उठकर घर के द्वार पर गोबर से गोवर्धन बनाकर उसे सजा कर उनकी एवं गाय की पूजा की जाती है और गायो को सजाया जाता है।
(5)भाई दूज(bhai duj )
कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भाई दूज या यम द्वितीया भी कहा जाता है।इस दिन बहनें भाई को आसन पर बैठा कर उनकी आरती उतारकर तिलक करती हैं ,उन्हें विभिन्न प्रकार के व्यंजन अपने हाथों से बना कर खिलाती हैं ,और भाइ उन्हें ढेर सारा प्यार और आशीर्वाद प्रदान करते हैं ,इस दिन भाई अपनी बहनों के घर जाकर भोजन ग्रहण करते हैं ।बहन उनकी आयु ,धन,यश और सुख प्राप्ति की कामना करती हैं।
दीपावली को मनाने की परंपरा(Tradition of celebrating Dipawali)
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दीपावली जैसा उसके नाम से ही ज्ञात होता है ,घरों में दीपो की पंक्ति बनाकर जलाने की परंपरा है ,वास्तव में प्राचीन काल से ही इस त्योहार को इसी तरह मनाया जाता है ।लोग अपने मकानों के मुंडेरो में,घर के द्वार पर, दिवालो पर दीपों की पंक्ति बनाकर मिट्टी के छोटे-छोटे दीप जलाते है। साथ ही आजकल छोटी- छोटी सुंदर लाइट लगाकर अपने घर आँगन को जगमगाते है जो कि बहुत ही आकर्षक लगती है।दीपावली के कई दिन पहले पहले से ही फल,मेवे,ओर मिठाइयों की दुकान सज जाती है।मिट्टी के दिये , लक्ष्मी जी की मूर्ति बाजार में महत्वपूर्ण आकर्षण का केंद्र होती है ,पटाखे आतिशबाजी की खरीदारी की जाती है।बताशे इत्यादि से दुकानों को दुल्हन की तरह सजा दिया जाता है।नए कपड़ो कि खरीदारी की जाती है ।व्यपारी लक्ष्मी जी की पूजा के साथ ही नए बहिखाते प्रारंभ करते हैं ।कुछ स्वार्थी लोगो द्वारा दीपावली के दिन जुआ खेलने,शराब पीना ,जैसी कुछ कुरीतियां भी इस पवित्र त्योहार के साथ जोड़ देती है जो कि गलत है।
sabhi ko diwali ki bahot bahot badhi happy diwali 2018
तमसो मा ज्योतिर्गमय
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तमसो मा ज्योतिर्गमय अर्थात वेदोक्ति हमें अंधकार को छोड़कर प्रकाश की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है ।अंधकार अज्ञान तथा प्रकाश का प्रतीक होता है। दीपावली जब हम अपने अज्ञानरूपी अंधकार को हटाकर ज्ञान रूपी प्रकाश को प्रज्वलित करते है। तो हमें एक असीम व आलोकिक आनंद की अनुभूति होती है।
जहां दीपावली का त्यौहार हमारे लिए लाभप्रद है वही इसका दोष भी है। दीपावली पर अधिक आतिशबाजी से बचना चाहिए जो की हमारे स्वास्थ्य के लिए अति आवश्यक है।जुआ जैसे खेल से धन की बर्बादी होती है ,इसलिए इन कुरीतियों को ना अपना कर दीपो से भरे इस त्योहार को (दीपो का उजाला और खुशियों का त्योहार है दीपावली,
ना करें कोई भी बुरे काम इसे अपनाये खुशियों के साथ।)




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